हमारे बारे में

किराड़-किरात समाज..

हम कौन हैं

Kirad-Kirat  Samaj (किराड़-किरात समाज)

किराड़-किरात  मूलतः एक ही जाति के समानार्थी शब्द हैं| एक  सामाजिक मनुष्य के लिए अपने समाज व जाति का आरंभ, उद्भव एवं विकास तथा उसकी क्षेत्रीय रहवासिता तथा कार्यशीलन उद्यमिता को जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंग्रेजो के शासन काल एवं पूर्ववर्ती राजशाही कालखंड में लिखे गये ऐसें समाज ग्रंथो में उपलब्ध शासकीय गँजेटियरो से स्पष्ट होता है कि  ‘किराड’ जाति  का आपना एक स्वर्णिम इतिहास रहा है । हम सब वंशज आज यह जानकर गौरवान्वित महसूस करते है कि  हमारी पहचान का वर्णन हर कालखंड के इतिहास में किसी न किसी विशिष्ट पहचान के रूप में दर्ज रहा है। इतिहासकारों, समाजशास्त्रियों के आलेख, शोधग्रंथों में राजस्थान के जोधपुर, बाड़मेर के किराडू, किरातकोट या किराटकूट (किराडू) से लेकर विक्रम संवत ९५६ से ९८१ तक के इतिहासकाल में किराड, किरात, किरार, धाकड़ जाति का शोर्यपूर्ण इतिहास दर्ज है। समय के साथ जाति वर्ग का फैलाव व् अध्ययन आज एक नवीन सामाजिक इतिहास को बयां करता है। बरार, भोपाल, धौलपुर, कोटा, ग्वालियर, होलकर,  सिंधप्रांत, लुहाना, जोधपुर, मालवांचल प्रदेश के किराडो की पहचान निकलकर आज देश- दुनिया के हर राज्य – देश में किसी न किसी कार्य उद्यम से बसाहट को दर्शित करती है ।

हमारा यह प्रयास समाज के इतिहास को जानने, समझने के साथ-साथ उन तमाम समाज बंधुओ तक पहुँचना  भी है, जिससे कि समाज की सामाजिकता, संस्कृति एवं रिश्तो- संबंधों की प्रगाढता की नवीन परिभाषा को और अधिक बेहतर रूप से समझा जा सके । यह तभी संभव है जब आपका यथेष्ट अपेक्षित प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष सहयोग, मार्गदर्शन हमें सतत प्राप्त होता रहेगा।

हमारे आधार स्तंभ

स्व. श्री मथूरादासजी उर्फ़ बबनराव किराड़

जन्म :१६. १०. १९३६
मृत्यु:२५. ०६. १९९५

पूणा : महाराष्ट्र किराड़ किरात समाज संगठन के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में स्व. बबनरावजी किराड़ के समाज कल्याणकारी कार्यों की एक विशिष्ठ पहचान आज भी देशभर में चिरस्मरणीय है। वे न केवल एक सच्चे समाजसेवी थे। वरन, राजनीति के क्षेत्र में भी एक कुशल राजनेता भी थे।वे पूना महानगर पालिका में सन्‌ १९६८से १९८५तक सभासद के रूप में दीर्घ समय तक कल्याणकारी कार्य करते रहें है। वे महाराष्ट्र प्रदेश  कांग्रेस समिति में सचिव पद पर भी रहें है। पूणा शहर कांग्रेस समिति में उपाध्यक्ष पद पर रहकर पार्टी को संगठित कर किराड़ समाज को भी गौरवान्वित करते रहें है। समाज के कार्यों में गहन रुचि रहनें के कारण उन्होंनें समाज को एकजुट करने उन्हें एक मंच पर एकत्रित करने तथा विद्यार्थियों के लिये तकनीकी  प्रशिक्षण कौशल्य  चलाने के लिये एक जनजागृति  निर्मित करने के सतत भरसक प्रयास किये। उन्होंनें समाज जन जागृति करने के लिये नागपुर, इन्दौर,ग्वालियर,भोपाल आदी शहरों ओर राज्यों में भ्रमण कर एक मिशाल क़ायम की।वे आज हमारें बीच में नहीं है परन्तु एक समाज संगठन के संस्थापक के रूप में उनके उद्देश्य ओर उनकी समाज हितों से जुड़ी विचारधारा सदैव्‌ समाज में एक प्रवाह के रूप में हमेंशा बहती रहेगी।

स्व.श्री शिवरामजी झीबलजी ननोरे (फूलवालें)

जन्म : 27.01.1923
मृत्यु :  २९. ०७. २०००

नागपुर : समाजमूल्यों ओर संस्कारमूल्यों के संवर्धन के प्रति संघर्षरत्‌ रहने वालें फूलवालें उर्फ़ स्व. श्री शिवराम झीबलजी ननोरे (किराड़) आज समाज में एक कर्तव्यनिष्ठ समाजसेवी कर्मयोगी के रूप में सदैव्‌ स्मरण रहेगा। समाज को एकजुट करने से लेकर,समाज जनगणना,समाज के पिछड़ेपन के उपाय नियोजन करने,महिलाओं को समाज कार्यों में सहभागी बनानें,ग़रीब बच्चों को एक मुक्कमल शिक्षा दिलवानें की अलख जगाने में स्व.श्री शिवरामजी फूलवालें आज भी समाज में सदैव्‌ याद किये जाते है। ओर याद किये जाते रहेंगें। महाराष्ट्र किराड़ किरात समाज संगठन के उद्देश्यों को गांव -गांव तक फैलानें,समाज को एकजुट करने,तथा महिला -पुरुषों में अधिकारों के प्रति समानतावादी विचारों को बढ़ावा देनें में आपका यथेष्ठ योगदान हर पीढ़ी को गौरवान्वित करता रहेगा।

स्व. श्री कुंजीलालजी पतिरामजी धाकड़

जन्म : २६. ०७. १९३६
मृत्यु : १८. ०९. २०१५

नागपुर : “ज़माने को हमनें बदला है ज़माना हमें क्या बदलेगा ” ऐसे वचन प्रतिबध्दता ओर कर्मठ समाजसेवी जिनकी सम्पूर्ण  जीवनशैली ही समाज कार्यों के प्रति ही समर्पित रही है ऐसे समाज रत्न स्व. कुंजीलालजी धाकड़ का नाम न केवल राज्य में वरन देश भर में वरिष्ठ समाजसेवियों के मध्य एक विशिष्ठ सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है। समाज के हर छोटे -बड़े कार्यों में उनकी उपस्थिति ओर भाषण महत्वपूर्ण स्थान रखते है। नागपुर में समाज की “श्रीसंत एकनाथ मंदिर किराड़ धर्मशाला “का निर्माण हो या समाज संगठन के तहत समाज को एकजुट करने का प्रयास हो,वे समाज निवासीत हर  एक -एक गांव में जाकर व्यक्तिगत्‌ रूप से मिलते समाजबंधुओं से प्रत्यक्ष मिलते थे। तकनीकी साधनों के अभावों में भी उन्होंनें समाज की विवरणिका ओर जनगणना पुस्तिका  को लेखनवध्द किया। जो कि एक मूल दस्तावेंज के रूप में समाज इतिहास के तहत संग्रहित है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने,समाज को राज्य ओर राष्ट्रीयस्तर पर संगठित करने, समाज के निर्धन बच्चों को शिक्षा से जोड़नें,असहाय परिजनों की उन्मुक्त रूप से मदद करने,समाज को राज्य में आरक्षण का उचित लाभ दिलाने,युवक -युवती परिचय सम्मेलन करने,समाज के रीति -रिवाजों से जुड़ें छोटे -बड़े कार्यक्रम करवानें की  दिशा में कई मंचीय राज्यस्तरीय कार्यक्रम कर समाज में जनजागृति की विचारधारा प्रवाह की है।आप  महाराष्ट्र किराड़ -किरात समाज संगठन के द्वितीय यशस्वी अध्यक्ष भी रहें हैं।

स्व.श्री प्रेमदासजी किशनसावजी बरबटे

जन्म: २५. ०९. १९३८
मृत्यु : २७. ११. २०१८

नागपुर : सरल सौम्य एवं अनुशासित जीवनशैली के धनी एवं महाराष्ट्र किराड़ -किरात समाज संगठन के ताउम्र कोषाध्यक्ष रहे ऐसे निपुन,कुशल एवं प्रखर प्रवक्ता स्व.श्री प्रेमदासजी बरबटे का अतुल्य समाजसेवी योगदान सदैव्‌ संगठन उद्देश्यों के नियोजन प्रारूप के साथ जुड़ा रहेगा। अपने मितव्ययी स्वभाव से समाज संगठन को एक सम्मानजनक कोष संग्रह में हरसंभव मदद की। संगठन उद्देश्यों को गांव -गांव में निवासीत हर एक समाजबंधु तक पहुंचानें एवं समाज संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिये यथेष्ठ आर्थिक सहयोग निधि से व्यक्तिगत्‌ सहयोग भावना को प्रोत्साहित किया। जिससे समाज मंचीय कार्यक्रम को एक ताकत मिली। उनका विगत्‌ वर्ष एकाएक दिनांक २५. ११. २०१८ को देवलोकगमन होने से समाज संगठन के लिये  बहुत बड़ी क्षति हुई है। समाज में हर एक समाजसेवी के प्रति उनका मृदुल  व्यवहार,सबको जोड़कर एकसूत्र में बांधें रखने की अदभूत कला के हमसब क़ायल थे। उनकी मितव्ययी शैली से आज जिस मुक़ाम ओर पहचान के रूप में स्थापित है यह उन्हीं के कोषाध्यक्ष दायित्व का ही परिणाम भी है। समाज संगठन के  वर्तमान पदाधिकारियों के लिये स्व. प्रेमदासजी बरबटें एक प्रभावोत्पादक प्रेरणा स्त्रोत है।

डां. रमेशचन्द्रजी सिन्हा

जन्म : 0२. 11. १९३5

मुम्बई : “शिक्षा ओर समाज विकास के महत्वपर्ण दष्टिकोण को एक साथ समान्नतर लेकर चलने के अथक प्रयास को ही भागीरथी उद्देश्य बनाने वाले डां रमेशचन्द्र सिन्हा (सेवानिवृत,निदेशक,शिक्षा विस्तार संकाय) ने शिक्षा क्षेत्र में जहां अनेक महत्वपूर्ण आयाम स्थापित कियें है वहीं उन्होंने समाज कार्यों को भी बहुत ही कुशलता ओर दक्षता से पूर्ण किया है। उन्होंनें शिक्षा क्षेत्र में जहां अतिव्यस्ता के रहते हुयें कई कार्यों की उल्लेखनीय एवं सराहनीय परिभाषा निर्मित की है वहीं वें समय निकालकर एक कर्मठ समाज सेवी की तरह जुनून लिये समाज को एकजुट करने ओर समाज मंच में सबको सहभागी बनाने में सैकड़ों छोटे -बड़े समाज कार्यक्रम आयोजित कर महाराष्ट्र राज्य के समाजबंधुओं को एक विशिष्ट पहचान भी देश के समाजबंधुओं के सामने रखने की भरसक कोशिश की है। आपने समाज सेवियों की एक ऐसी टीम तैयार की जो अपनी कार्यकुशलता,क्षमता,ओर नेतृत्व निपुणता की अनोखी मिशाल बनी। २० जनवरी,१९८३को पूणा में श्रीबबनरावजी किराड़ की अध्यक्षता में महाराष्ट्र किराड़ किरात समाज संगठन की नींव के आप महासचिव भी रहें हैं। तथा उनके सहयोगी कोषाध्यक्ष श्री प्रेमदासजी बरबटे थे। समाज में ग़रीब विद्यार्थियों के कल्याण की बात हो या उनकी शिक्षा के सुधारात्मक उपक्रम के नियोजन सबमें आपकी सक्रिय सहभागिता रही है। वर्तमान में आप मुम्बई में रहकर शिक्षा ओर समाज सेवा कार्यों में यथेष्ट रूप से सक्रिय हैं।

हमारा दृष्टिकोण

We facilitate for Develop Samaj

  • समस्या के निराकरण में सदैव तत्परता

  • सामाजिक एकजुटता बढ़ानें के कारगर उपाय

  • जीवन में शिक्षा की अनिवार्यता का संकल्प

  • जीवन साथी के चयन हेतू परिचय उपक्रम नियोजन

  • शिक्षा,विवाह,विवाद, व्यापार,उद्यम परामर्श के प्रति संकल्पितता

  • वरिष्ठजनों को संरक्षण एवं परिजनों को मार्गदर्शन

01.

— हमारा लक्ष्य

हमारा यह प्रयास समाज के इतिहास को जानने, समझने के साथ-साथ उन तमाम समाज बंधुओ तक पहुँचना  भी है, जिससे कि समाज की सामाजिकता, संस्कृति एवं रिश्तो- संबंधों की प्रगाढता की नवीन परिभाषा को और अधिक बेहतर रूप से समझा जा सके । यह तभी संभव है जब आपका यथेष्ट अपेक्षित प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष सहयोग, मार्गदर्शन हमें सतत प्राप्त होता रहेगा।
02.

— हमारी दृष्टि

हमारा यह प्रयास समाज के इतिहास को जानने, समझने के साथ-साथ उन तमाम समाज बंधुओ तक पहुँचना  भी है, जिससे कि समाज की सामाजिकता, संस्कृति एवं रिश्तो- संबंधों की प्रगाढता की नवीन परिभाषा को और अधिक बेहतर रूप से समझा जा सके । यह तभी संभव है जब आपका यथेष्ट अपेक्षित प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष सहयोग, मार्गदर्शन हमें सतत प्राप्त होता रहेगा।
03.

— हमारी कहानी

The Kirars, Gujars, and Raghuvansis apparently entered the Central Provinces together, and the fact that they still smoke from the same huqqa and take water from each other’s drinking vessels may be a reminiscence of this bond of fellowship. All these castes claim, and probably with truth, to be degraded Rajputs. The Kirars’ version is that they took to widow -marriage and were consequently degraded. According to another story they were driven from their native place by a Muhammadan invasion.