किराड़-किरात समाज और किराड़ मैट्रिमोनी में आपका स्वागत है

हमें जानें

Kirad Kirat  Samaj

हमारा यह प्रयास समाज के इतिहास को जानने, समझने के साथ-साथ उन तमाम समाज बंधुओ तक पहुँचना भी है, जिससे कि समाज की सामाजिकता, संस्कृति एवं रिश्तो- संबंधों की प्रगाढता की नवीन परिभाषा को और अधिक बेहतर रूप से समझा जा सके । यह तभी संभव है जब आपका यथेष्ट अपेक्षित प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष सहयोग, मार्गदर्शन हमें सतत प्राप्त होता रहेगा।

हम क्या करते हैं

01.

“समस्या के निराकरण में सदैव तत्परता “

महाराष्ट्र किराड़ -किरात समाज संगठन का प्रमुख उद्देश्य ही यही है कि समाज के हर तबकें कि सामाजिक,पारिवारिक एवं व्यक्तिगत समस्याओं के निराकरण हेतू उचित सकारात्मक पहल करना,यथेष्ठ मार्गदर्शन प्रदान करना,आर्थिक रूप से कमज़ोर, बेसहारा, बेरोज़गार युवक -युवतियों ,विधवा,विदुर, ओर ज़रूरतमंद को बैंक या अन्य मददगार ऐजेन्सियों से ऋण प्रदान करवाने में मदद करना एवं उचित परार्मश प्रदान करना प्रमुख है।

02.

“सामाजिक एकजुटता बढ़ानें के कारगर उपाय “

समाज संगठन के माध्यम से न केवल मंचीय कार्यक्रम आयोजित करना वरन समाज के हर समाजबंधुओं (महिला /पुरूष /युवाओं)तक संगठन का सीधा सम्पर्क हो ओर उनकी शैक्षणिक,सामाजिक,कृषिगत,व्यापारिक एवं संस्कारमूल्यों -जीवनमूल्यों तथा रीतिगत -रिवाजों के तानेबांने को संयोजनें के बेहद प्रभावी कारगर प्रयासों से सबके जीवन को आनंदित एवं विकासोन्मुखी बनाने के तकनीकी व्यवहारगत्‌ प्रयास संगठन के प्रमुख उद्देश्य है। जिससे कि समाज की सर्वउपयोगी जानकारी संगठन के पास एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ के रूप में समाज धरोहर के रूप में बनी रह सके। ओर आने वाली हर पीढ़ी को एक समग्र रूप से समाज के इतिहास की संवैधानिक जानकारी एक ही समय में एक स्थान पर सुलभता प्राप्त हो सकेगी।

03.

“जीवन में शिक्षा की अनिवार्यता का संकल्प”

समाज संगठन के माध्यम से शिक्षा,शिक्षण एवं जीवनोत्सर्ग से जुड़ने के लिये रोजगारमुखीस्तरीय शिक्षण लक्ष्य तक समाज के विद्यार्थियों इन सबकों ऋण लाभ प्रदान के साधन,सेवा ओर सुविधा तंत्र से अभिमुख (परिचित) कराना तथा आत्म निर्भर बनाने के कारगर प्रशिक्षण,परार्मश केन्द्र, गाईड़ेंस एवं काउन्सिलिंग करना,इस हेतू विषय विशेषज्ञों से नियोजन करवाना ओर समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना प्रमुख है। साथ ही,समाज के विद्यार्थीगण शालाओं से ड्रापआउट (बीच में शाला न छोड़ें)से बचाना,उनके परिजनों को शिक्षा अनिवार्यता के महत्व से अभिप्रेरित करना ओर जीवन में शिक्षा -शिक्षण की महत्ता से संकल्पित बनाना संगठन का प्रमुख लक्ष्य है।

04.

“जीवन साथी के चयन हेतू परिचय उपक्रम नियोजन “

आज की भौतिकवादी आपाधापी दौड़ में समयाभाव के कारण योग्य,मनपसंद जीवनसाथी के चयन में समाज संगठन के मंच से हर आयुवर्ग, वेतनसेवी,व्यापारिक एवं स्वजातीय वर-वधू की उचित तलाश को प्रत्यक्ष मंच से परिचित करवाना तथा आपसी वैचारिक सोच के मार्ग प्रशस्त करना तथा देश एवं विदेश में निवासित समाज के युवक -युवतियों को अपने स्वजातीय जीवन साथी चयन के भाग्य को सौभाग्य में बदलनें के उचित अवसर हर वर्ष प्रदान करना। इस माध्यम से सामाजिक एकजुटता ओर सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना प्रमुख उद्देश्य है।

05.

“शिक्षा,विवाह,विवाद, व्यापार,उद्यम परामर्श के प्रति संकल्पितता”

परिवार है तो समाज है। समाज है तो सामाजिक समस्याएं हैं ओर इन सामाजिक,शैक्षणिक,पारिवारिक,व्यापारिक एवं उद्यमशील जीवनशैली को आत्मसात करने में आनेवाली छोटी -बड़ी समस्याओं के लिये उचित दिक्‌दर्शन ,मार्गदर्शन,परामर्श प्रदान कर सबकों सामाजिक एकजुटता के तहत प्रगतिशील बनाने के उचित अवसर प्रदान करना ही समाज संगठन का प्रमुख उद्देश्य है। युवक -युवतियों को लक्ष्यनुरूप शिक्षा के अवसर,मार्गदर्शन,विवाह योग्य तथ्यगत पूर्णजानकारी प्रदान करना,पारिवारिक कलह -विवाद सुलझानें,उद्यम कौशल्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मुहैया कराने तथा स्वरोजगार,स्वव्यापार को प्रोत्साहित कर सम्बलता प्रदान करना प्रमुख है।

06.

“वरिष्ठजनों को संरक्षण एवं परिजनों को मार्गदर्शन”

समाज में जीवनमूल्यों एवं संस्कारमूल्यों की सदैव रक्षा करने वालें,समाज संस्कृति के प्रवाह को पीढ़ी- दर -पीढ़ी हस्तांतरित करने वालें समाज मूल्यवर्धक देवस्वरूप मातृ शक्ति -पितृशक्ति का यथोचित सम्मान,परिजनों को उनकी उचित देखभाल के लियें प्रेरित करना,युवाओं को उनके एवं वरिष्ठों के प्रति कर्तव्य – दायित्वमूल्यों से परिचित कराना। स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देना, आत्मनिर्भर बनाने के गुण कौशल्य के अवसर प्रदान करना,दहेज,मृत्युभोज,व्यसन जैसी आदी सामाजिक कुरीतियों,रीतियों के प्रति संचेतना जाग्रत करना,पारिवारिक विघटन (विभाजन )से रोकने के लिये परामर्श प्रदान करना,गैर-जातीय (बेमेल) विवाह को रोकने तथा परामर्थ प्रदान करने,असमर्थता से उभारने,स्वजातीय विवाह के प्रति वैचारिक समझ को बढ़ाने ओर निर्णय क्षमता को सम्बलता प्रदान करना है।


और पढो